बुधवार, सितंबर 19, 2007

दिन जल्दी-जल्दी ढलता है

हो जाय न पथ में रात कहीं,
मंज़िल भी तो है दूर नहीं -
यह सोच थका दिन का पंथी भी जल्दी-जल्दी चलता है!
दिन जल्दी-जल्दी ढलता है!

बच्चे प्रत्याशा में होंगे,
नीड़ों से झाँक रहे होंगे -
यह ध्यान परों में चिड़ियों के भरता कितनी चंचलता है!
दिन जल्दी-जल्दी ढलता है!

मुझसे मिलने को कौन विकल?
मैं होऊँ किसके हित चंचल? -
यह प्रश्न शिथिल करता पद को, भरता उर में विह्वलता है!
दिन जल्दी-जल्दी ढलता है!

- हरिवंशराय बच्चन

2 टिप्‍पणियां:

  1. मैं तो आपका चिट्ठा फायर फॉक्स में देख रहा हूं। एकदम ठीक दिखायी पड़ रहा है। शायद आपने जो नोटिस लगा रखी है उसकी आवश्यकता नहीं।
    कुछ फायरफॉक्स पैंगो इनेबल्ड नहीं होता है उसमें यह तकलीफ होती है। इसे दूर करने के बाद ऐसी कौई मुश्किल नहीं होती।

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  2. Dhanyawaad, ki aapne mera blog padha...aur yeh tippani di.

    On my machine this problem was there and I did not know the technical reason, so have put up the note there... there would be many more like me :)

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