गुरुवार, सितंबर 09, 2010

भगवान

भगवान हर जगह है
इसलिये जब भी जी चाहता है
मैं उन्हे मुट्ठी में कर लेता हूँ
तुम भी कर सकते हो
हमारे तुम्हारे भगवान में
कौन महान है
निर्भर करता है
किसकी मुट्ठी बलवान है।

- विश्वनाथ प्रताप सिंह

3 टिप्‍पणियां:

  1. Rajeev Kumar12:35 am

    Hi. this is the wonderful collection made by u, I got revision of those lovely poems which were the most interesting one during school days.

    उत्तर देंहटाएं