करि की चुराई चाल
सिंह को चुरायो लंक
ससि को चुरायो मुख
नासा चोरी कीर की
पिक को चुरायो बैन
मृग को चुरायो नैन
दतन अनार
हँसी बिजुरी गंभीर की
कहे कवि बेनी बेनी ब्याल की चुराय लीनी
रति रति सोभा सब रती के सरीर की
अब तो कन्हैया जी को
चित ही चुराय लीन्हो
चोरटी है गोरठी यह छोरटी अहीर की.
- कवि बेनी