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मंगलवार, अगस्त 28, 2007

राधा सौन्दर्य

करि की चुराई चाल
सिंह को चुरायो लंक
ससि को चुरायो मुख
नासा चोरी कीर की

पिक को चुरायो बैन
मृग को चुरायो नैन
दतन अनार
हँसी बिजुरी गंभीर की

कहे कवि बेनी बेनी ब्याल की चुराय लीनी
रति रति सोभा सब रती के सरीर की
अब तो कन्हैया जी को
चित ही चुराय लीन्हो
चोरटी है गोरठी यह छोरटी अहीर की.

- कवि बेनी